अनोखी धरा
अखिल भुवन में धरा अनोखी जीवन से जो संचारित सूर्य-चंद्र रक्षक सम बैठे पंचभूत पर आधारित।। नील-हरित आभा से मंडित रत्नों के भंडार भरे सरिता,सागर और सरोवर कल-कल-कल का नाद करे षडऋतुओं का चक्र निरंतर करता इसको श्रृंगारित सूर्य-चंद्र रक्षक सम बैठे पंचभूत पर आधारित।। समरसता का भाव हृदय में ममता की बरसात करे देवों को भी प्रिय लगती है आकर वे अवतार धरे वेदों ने महिमा गाई है काल करे सब निर्धारित सूर्य-चंद्र रक्षक सम बैठे पंचभूत पर आधारित।। हरती सब संताप जीव का सहन करे अपघातों को करुणा कलित क्षमा करती है मानव की सब बातों को बन तपस्विनी धरणी तपती सूर्य मंत्र कर उच्चारित भानु-चंद्र रक्षक सम बैठे पंचभूत पर आधारित।। अभिलाषा चौहान