संदेश

कहानी लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जाल

चित्र
सुरेश जी सिर पकड़ कर बैठे थे।हाथ में कुछ कागज थे, उन्हें बार-बार देखते और फिर गहरी सांस भरते।माथे पर पसीना छलक रहा था।पति को इस तरह बैठे देख रागिनी घबरा उठी। "क्या हुआ जी!जबसे डाकिया आया है,आप यूँ ही बैठे रह गए।कोई परेशानी वाली बात है।बताओ तो मुझे।" सुरेश जी पत्थर का बुत बने बैठे थे। रागिनी ने उन्हें पकड़ कर हिलाया,पर वे कुछ न बोले तो रागिनी ने वे कागज उनके हाथ से लेकर पढ़ना शुरू किया और उसके बाद वो भी सिर पकड़ कर धम्म से उनके पास रखी कुर्सी पर गिर गई। दोनों को जैसे साँप सूँघ गया था। सुरेश जी सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी थे और रागिनी एक शिक्षिका,उसकी सेवानिवृत्ती में एक वर्ष बाकी था।उनकी एक ही संतान थी,जो शादी के कई वर्ष बाद हुई थी। ईश्वर ने देर से ही सही,उनकी झोली में एक पुत्र डाल दिया था।आज उनका बेटा साफ्टवेयर इंजीनियर था।अभी दो महीने पहले ही बड़ी धूमधाम से उसकी शादी की थी।अपने सारे अरमान पूरे किए थे।जो भी शादी में आया ,वो गद-गद होकर गया था।बेटा भी उन्हें श्रवण कुमार जैसा मिला था और ईश्वर की कृपा से बहू भी परी जैसी आई थी।जिसने देखा उसने सराहा।उनके भाग्य को लेकर लोग अक्सर ...

मौत से साक्षात्कार

चित्र
प्रकाश एक बेहतरीन लेखक था,पाठक उसकी रचनाओं की प्रतीक्षा करते थे। कहानी हो या उपन्यास या फिर कविता उसकी लेखनी कमाल की थी और पात्र-चयन तो और भी उत्तम।पिछले कुछ दिनों से वित्तीय समस्या के कारण वह तनाव में चल रहा था ,इससे उसका लेखन भी अछूता नहीं रहा था।वह एक कहानी लिख रहा था ,जो अभी अधूरी थी। एक दिन प्रकाश किसी काम से जा रहा था।उसका ध्यान भटका हुआ था,अचानक एक कार तेजी से आई और उसने प्रकाश को टक्कर मार दी।प्रकाश उछलकर दूर गिरा और बेहोश हो गया।उसे अस्पताल ले जाया गया।सिर में चोट लगी थी। डाक्टर्स जांच कर रहे थे।परिजन अस्पताल पहुंच चुके थे। डाक्टर ने सभी को बता दिया था कि हालत सीरियस है , आपरेशन होगा ,उसके बाद भी कुछ कहा नहीं जा सकता।परिजन दुखी थे,डाक्टरों ने ईश्वर पर विश्वास रखने और दुआ करने के लिए बोल दिया था। आपरेशन सफल रहा था लेकिन प्रकाश कोमा में चला गयाथा, कोमा  में व्यक्ति का शरीर निष्क्रिय हो जाता है, क्योंकि उसका दिमाग काम करना बंद कर देता है,लेकिन बाहर होने वाली बातचीत कभी-कभी दिमाग को सक्रिय कर देती है और व्यक्ति को कोमा से बाहर आने में मदद करती है। परिजनों को डा...

अनूठी मिसाल

चित्र
भारतीय वायुसेना के गरूण कमांडो ज्योति प्रकाश निराला पूरे एक साल बाद एक महीने की छुट्टी पर घर आए थे। माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं था और बहनें तो भाई के आगे-पीछे घूम रहीं थीं,चार बहनों का एक अकेला भाई परिवार का कर्ता-धर्ता.. माता-पिता के बुढ़ापे की लाठी.... सेवाभावी...स्वभाव से मृदुल..सबका ध्यान रखने वाला देशभक्ति से लबरेज बेटे के आने से मानों परिवार में खुशियां बरस पड़ी थी। इन खुशियों में चार चांद तब लग गए,जब छोटी बहन का रिश्ता तय हुआ। विवाह तय होते ही परिवार में विवाह की तैयारियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई। ज्योति कहता..देखना पिताजी कैसे धूम-धाम से करता हूं सरला की शादी....दीदी की शादी में ,मैं छोटा था..। लेकिन अब मैं जिम्मेदार हूं और ऐसी शादी करूंगा सरला की...सारा गांव देखता रह जाएगा। देखते-देखते एक महीना बीत गया था.. छुट्टियां खत्म हो रहीं थीं..दिन पंख लगा कर उड़ गए थे...विवाह में तीन माह शेष थे..फिर जल्दी आने की बात कह कर ज्योति ड्यूटी पर जम्मू -कश्मीर चला गया। वह वायुसेना के द्वारा संचालित आपरेशन रक्षक का अहम सदस्य था। १८ नबंबर २०१७  को आतंकवादियों स...