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यात्रा भव्यता से दिव्यता तक-६

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 गतांक से आगे आज हमें अयोध्या के लिए निकलना था।सुबह हम जल्दी उठ गए थे।वापस जाने का बिल्कुल मन नहीं था।जितनी खुशी आने की थी,उतना ही दुख जाने का हो रहा था।गंगा की लहरों में,बाबा विश्वनाथ की काशी में मन खो गया था लेकिन आना सत्य है तो जाना भी।हम दश्वाश्वमेध घाट पर गए।मां गंगा को नमन किया,सर्व मंगल की कामना की और उन्हें दीप और पुष्प अर्पित किए।साढ़े नौ बजे वंदे भारत से अयोध्या जाना था।साढ़े आठ बजे होटल के अटेंडेंट ने हमें नंदी चौक पर आटो में बैठा दिया और हम निकल पड़े अपनी अगली यात्रा पर ।बाबा विश्वनाथ से विदा लेकर हम राम जन्मभूमि तीर्थ की ओर रामलला के दर्शन की प्रतीक्षा मन को आह्लादित कर रही थी।करीब साढ़े बारह बजे हम अयोध्या धाम जंक्शन पर उतरे....और फिर जो दृश्य सामने था ,उससे हमें समझ आया कि विकास की बातें सिर्फ बातें नहीं है। एयरपोर्ट जैसा बड़ा सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त भव्य रेलवे स्टेशन,ऐसा रेलवे स्टेशन ना तो दिल्ली का है और ना मुंबई का ,ना बेंगलुरु का और ना ही जयपुर का। अयोध्या धाम जंक्शन  स्टेशन से हमारा होटल तीन किलोमीटर दूर था।हवा में रामभक्ति की लहर विद्यमान थी। होटेल रा...