जीत निश्चित है हमारी
लक्ष्य साधा है प्रिये तो, अंत तक फिर साथ चलना। हाल कैसा भी रहे पर, पथ से अपने मत विचलना। नेह के धागे सुकोमल,रेशमी भावों के मोती। ये समर्पण मांगते हैं,आस की जलती है ज्योति। मन गह्वर में है मचलती, अनगिनत ये कामनाएं। हो विषम पथ या विपत्ति,स्वयं को बस साथ पाएं। दीप्त उर में लौ फुदकती , शलभ बन कर तुम किलकना। हाल कैसा भी..........। तन तो नश्वर है सभी का,जो कभी चिर ना रहेगा। प्राण से होगा मिलन तो,अनंत तक ये संग चलेगा। गंध को महसूस कर लो,पुष्प से किसका क्या लेना। जो रमा कण-कण में है,उसको क्या पहचान देना। आत्म चिंतन कर लिया तो, हो सकेगा कोई छल ना। हाल कैसा भी...........। तारिकाएं चांद-सूरज ,हैं सदा ही मुस्कुराते। कुंज कानन तृण लताएं,हैं हठी, तूफान आते। सृष्टि का बस ये नियम है,हार कर मत बैठ जाना। हो भंवर में नाव लेकिन, हौंसले से पार पाना। जीत निश्चित ही हमारी भूल जाओ बस फिसलना। हाल कैसा भी.......….। अभिलाषा चौहान