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जय माता दी

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आप सभी शारदीय नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏 🙏  मात शारदे आदि भवानी । सदागति दुर्गा महारानी।। मैं अज्ञानी बालक तेरा। करता रहता मेरा-मेरा।। मातंगी चामुंडा माता। द्वार तुम्हारे जो भी आता।। मैया उसका दुख हर लेती। झोली भर-भर खुशियां देती।। मां मैं भिक्षुक तुम हो दाता। बिन माँगे ही सबकुछ पाता।। तुमने कितने दानव मारे। भक्त जनों के काज सँवारे ।। सती साध्वी पार्वती काली। महिमा अपरम्पार निराली।। कालरात्रि  गौरी भव प्रीता। अद्भुत अनुपम रूप पुनीता।। माता काट काल का घेरा। आधि व्याधि ने डाला डेरा।। पाप बढ़े अब धरती ऊपर। दानव बैठे आकर घर-घर।। दीन हीन सब निर्बल शोषित। अत्याचारी होते तोषित।। आज अधर्मी सुख से जीते। पीड़ित मौन सदा दुख पीते। । जग कल्याणी शूलधारिणी। आध्या शक्ति ब्रह्मचारिणी।। मात हृदय में आप पधारो। पापी जन को आप उबारो।। मन भटके जब-जब भी मेरा। जग में दिखता मुझे अँधेरा।। कौन किसी का बने खिवैया। तड़प रहा दर्शन को मैया।। देव दनुज सब करते पूजा। तुमसा और कौन है दूजा।। दुर्गनाशिनी संकटहरिणी। नारायणी शैलविहारिणी ।। नाम जपें हम करते  विनती। क्षमा करो मां सब है सुनती।। सबका मंगल कर...

विनय-पत्रिका

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किशन कन्हैया बंशी वाले । भक्तों के तुम हो रखवाले। हे गोवर्धन हे गिरिधारी। अब तो सुन लो विनय हमारी। नंद यशोदा के सुत प्यारे। लीलाधर तुम कितने न्यारे। राधा के उर तुम्हीं बसे थे। प्रेम बंध में तुम्हीं कसे थे। तुमने कितने दानव मारे। कितने पापी तुमने तारे। अर्जुन के तुम बने सारथी। ये कौरव की बड़ी हार थी। हे गोविंदा हे गोपाला। हम हैं पापी मन है काला। अब उद्धार करो जगदीश्वर । हे करुणाकर हे विश्वेश्वर। गोकुल में तुम रास रचाए। मथुरा शासन तुम्हें सुहाए। बने द्वारकाधीश कृपाला। सुंदर अद्भुत रूप विशाला। मित्र सुदामा के पग धोए। दीन दशा देख श्याम रोए। बिन माँगे ही सब दे डाला। ऐसे हो तुम दीन दयाला। पांचाली पर विपदा आई। बात तुम्हें यह नहीं सुहाई। आकर तुमने चीर बढ़ाया। अधिकारों का पाठ पढ़ाया। हे गोवर्धन हे गिरिधारी । हे मधुवन के रासबिहारी । अंतर्यामी हे प्रभु मेरे। करो दूर अब सभी अँधेरे अधर्म राज और पापी राजा। दुराचार का बजता बाजा। कुछ तो कृपा करो अब मोहन। पाप राज का कर दो दोहन। तुमने गीता ज्ञान दिया था। अर्जुन ने तब युद्ध किया था। दुर्बल कायर हम बन बैठे। बात कोई मन में न पैठे। आकर अलख जगाओ फिर से। बोध ...

हिंदी दिवस पर विशेष

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हिंदी दिवस पर विशेष हम हर साल हिंदी दिवस मनाते हैं और अपने कर्तव्य की इति श्री कर लेते हैं।पता नहीं यह कैसा चलन है कि अब किसी के प्रति अपने भाव अभिव्यक्त करने के लिए या अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए एक दिन सुनिश्चित कर लिया गया है।उस दिन जोर-शोर से कार्यक्रम होते हैं,सब अपनी भागीदारी निभाकर फिर सब भूल जाते हैं। चाहे पुत्री दिवस हो,मातृ-दिवस हो या पितृ-दिवस हो या और कोई सा भी दिवस। ऐसा लगता है हमने दिखावा करना बखूबी सीख लिया है।अब हम दिखावे को सत्य मानते हैं या फिर इतने भुलक्कड़ है कि अपने कर्तव्यों को भूल जाते हैं और हमें अपने कर्तव्य याद दिलाने के लिए साल में एक बार इन दिनों को मनाने की तिथि निर्धारित कर दी गई है।तभी तो नई पीढ़ी ने भी यह सीख लिया है कि माता-पिता,बहन-बेटी सिर्फ कभी-कभी याद करने बात है।भाषा तो बहुत दूर की बात है।अगर हम इतने ही कर्तव्य-निष्ठ होते तो अंग्रेजियत के गुलाम बनकर थोड़े ही रहते।आजकल बड़े -बड़े स्कूलों में बच्चों को "अ आ इ ई "ही नहीं सिखाई जाती।अब यह भी कोई सिखाने की चीज है,इससे कोई सम्मान तो मिलने वाला नहीं,जब तक आप फर्राटेदार अंग्रेजी नहीं बोलते,आप स...