अनुपम किताबें (विधा-सेदोका)
विद्या की देवी अनुपम किताबें सदा देती हैं सीख दिखाती राह मिटाती हैं अज्ञान बनकर वरदान। किताब कहे कहानी अनसुनी सुख-दुख से बुनी अपनी लगे जिंदगी से हैं जुड़ी सपनों की हैं लड़ी। किताबें साथी अकेलापन मिटे अंधकार भी छटे भाव सबल साहित्य का भंडार अनोखा है संसार। किताबें बोझ बचपन है दबा फिरे इनको लादे भूला है खेल बड़ी रेलमपेल बन गया है जेल। अभिलाषा चौहान स्वरचित मौलिक