बस इतनी सी बात
मौत से पहले मौत की आहट सुन काँपती रूहें अधमरी गिरती टूटती साँसे खौफ से काले पड़े चेहरे पर पथराई फटी आँखें देखती मंजर अपने जनाजे का जिससे दूर है काँधा गैरों सी जिंदगी हमनवा मौत की बन खीसें निपोरती पल्ला झाड़कर दूर खड़ी अगूँठा दिखाती आदमी से दूर होता आदमी आँखों में सूखे सागर को पीता हुआ धरती और आसमान के बीच सूखे तिनके सा बस जल रहा है अपने न होने का धुधँला अहसास चौतरफा मार अव्यवस्था में गेंद सा न जाने किस-किस के हाथों में उछलता करता पूरा है से था बनने का सफर बस इतनी सी बात ??