नाशिक, शिर्डी, औरंगाबाद
गतांक से आगे एलोरा Elora caves मंदिर पहुंचने में हमें एक मिनट ही लगा...इस समय आना वरदान से कम नहीं था....भीड़ ही नहीं थी।हम जल्दी-जल्दी चलते हुए मंदिर में पहुंच गए थे। मंदिर काले और लाल पत्थर से बना हुआ था और क्यों ना हो क्योंकि हमारे प्राचीन मंदिरों ने आक्रांताओं के जितने दंश सहे हैं वो किसी से भी छिपे नहीं हैं।इस मंदिर को भी बार-बार तोड़ा गया लेकिन फिर भी यह अपनी धर्म ध्वजा को आज भी लहरा रहा है। दक्षिणी शिल्प कला का सुंदर उदाहरण है यह मंदिर।यह मंदिर इसलिए भी अनोखा है क्योंकि यहां पूरा शिव परिवार स्थापित है।हम लोग ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर चुके थे।मन अगाध आनंद से भर गया था।थोड़ी देर रुकने के बाद हम प्रांगण में आ गए।बैठकर मंदिर को निहारते रहे आसमान में चमकता चांद मंदिर के शिखर पर लगा हुआ प्रतीत हो रहा था। मंदिर के कपाट बंद हो चुके थे।हम लोग भी बाहर निकल आए क्योंकि सुबह रुद्राभिषेक के लिए वापस आना था।पैदल चलते हुए हमने जो देखा वो हमारे मन को दुखी कर रहा था।गंदगी बहुत थी....चाहे यहां हो या त्र्यंबकेश्वर....इतने महत्व के स्थानों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है। शिर्डी जहां साफ-सुथरा था व...