द्वारका-सोमनाथ
गतांक से आगे नागेश्वर ज्योतिर्लिंग बेट द्वारका के रास्ते में ही गोपी तालाब पड़ता है।यह अपना पौराणिक महत्व रखता है।गोपी तालाब पहुंच कर हमने देखा कि यहां बहुत सारे प्राचीन मंदिर है,हर घर में मंदिर हैं।इसका नाम गोपी तालाब क्यों है...?पूछने पर हमें पता चला कि कृष्ण जब द्वारका आए थे तो उनके साथ सारी गोपियां भी आईं थीं और उन्होंने यहीं पर अपना देह त्याग किया था... यह उनके प्रेम और त्याग का अद्भुत उदाहरण था तबसे इसका नाम गोपी तालाब पड़ गया था। यहां की मिट्टी बिल्कुल पीली है जिसे गोपी चंदन के नाम से जाना जाता है।इस पवित्र मिट्टी से बना चंदन भक्त अपने माथे पर लगाते हैं और यहीं चंदन कृष्ण भक्ति की पराकाष्ठा का प्रतीक भी है,तालाब के पास घाट बने हुए थे।हमने घाट पर उतर कर जलांजलि अर्पित की।यह जगह पेड़ों से आच्छादित है और गोपी तीर्थ के रुप में जानी जाती है पर एक बात अखर रही थी कि हमारे भारतवर्ष में ऐसे स्थलों को जो अपना पौराणिक महत्व रखते हैं,उतना महत्व नहीं दिया जाता ,जितना देना चाहिए। यहां एक व्यवस्था होनी चाहिए जो यहां का रखरखाव करे,भले ही इसके लिए टिकट की व्यवस्था की जाए,इतने सुंदर औ...