द्वारका -सोमनाथ
गतांक से आगे सोमनाथ मंदिर गुजरात तीन बजे हम सोमनाथ दर्शन के लिए निकल पड़े। सोमनाथ इस समय सजा हुआ था। फुटपाथिया दुकानें ढंकी हुईं थीं। साफ-सफाई तो होनी ही थी क्योंकि प्रधानमंत्री जी का दौरा जो था।हम सबसे पहले "भालकातीर्थ "गए। मंदिर का प्रांगण विशाल था।कुंड भी बना हुआ था।मंदिर में श्रीकृष्ण की अधलेटी हुई प्रतिमा है,यही वह जगह है जहां भगवान श्रीकृष्ण को जरा नामक शिकारी ने उनके पैर में तीर मारा था।कहते हैं कि श्रीकृष्ण के पैर में एक चक्र था जो हमेशा चमकता रहता था।जिसे शिकारी ने हिरण की आंख समझ लिया था।मंदिर सुंदर और भव्य था। मंदिर की बनावट और शिल्प मन मोह रही थी। यहां पर भी छोटे-छोटे मंदिर बने हुए थे।हमने सबके दर्शन किए।इसके बाद हम सूर्य मंदिर गए। यहां पर आसपास कई मंदिर हैं।सूर्य मंदिर ज्यादा बड़ा तो नहीं था पर प्राचीन था। कोणार्क जैसी ही शिल्पकला थी । यहां सूर्य भगवान अपनी दोनों पत्नियों के साथ विराजमान हैं। यहां पर पांडव गुफा भी हैं।कहते हैं अपने वनवास काल में पांडव इन गुफाओं में निवास करते थे पर नाम तो था पर देखने की हिम्मत नहीं हुई क्योंकि वे काफी नीचे थीं और ग...