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नाशिक, शिर्डी,औरंगाबाद

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गतांक से आगे द्वारावती भक्त निवास  शिर्डी पहुंचते-पहुंचते हमें नौ बज गए थे। शिर्डी का वैभव कितना बढ़ गया है,साफ दिखाई दे रहा था। बड़े-बड़े होटल,शोरूम्स,शानदार सड़कें सबकुछ बहुत सुन्दर लग रहा था।हमने 'द्वारावती भक्त निवास'में अपने कमरे बुक किए थे।हम पहले भी यहां ठहर चुके थे।यह भक्त निवास शानदार,साफ-सुथरा और सभी सुविधाओं से युक्त है।यह चार मंजिला इमारत काफी लंबे-चौड़े एरिया में बनी हुई है। इसमें कितने कमरे हैं...ये तो नहीं पता पर यह कभी खाली नहीं होती... यहां आकर अगर इसमें आप ठहरना चाहें तो आपकी किस्मत ही होगी कि आपको कमरा मिले अन्यथा कमरा नहीं मिलता।इसकी बुकिंग साईं ट्रस्ट के माध्यम से आनलाइन ही दो माह पूर्व होती है अर्थात जिस तारीख को आपको कमरा चाहिए, उसी तारीख को दो महीने पहले बुक करें।यह स्थान इतना सुन्दर है कि आप यहां आकर जाना नहीं चाहेंगे।साफ-सुथरे एसी कमरे ,सभी सुविधाओं से युक्त और किराया मात्र नौ सौ रुपए और नान एसी रूम साढ़े चार सौ रुपए में मिल जाते हैं।यह स्थान शिर्डी समाधि स्थल से करीब आठ सौ या नौ सौ मीटर पर है। यहां केंटीन भी है जिसमें आपको खाना भी मुफ्त मिल जाता है और...

नाशिक-शिर्डी-औरंगाबाद

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फ़रवरी माह में हम नासिक, शिर्डी और औरंगाबाद की यात्रा पर गए।नासिक और शिर्डी तो हम पहले भी गए थे लेकिन इस बार औरंगाबाद नया था हमारे लिए। दरअसल हम मुंबई शादी में गए थे तो वहीं से इस यात्रा का आयोजन कर लिया।हमने अपनी गाड़ी बुक कर ली थी। कल्याण, मुंबई से हम सुबह आठ बजे त्र्यंबकेश्वर नाशिक के लिए निकल गए थे।हम जिस हाइवे से जा रहे थे,वह समृद्धि हाइवे है और शानदार बना हुआ है।साफ-सुथरे रेस्ट रूम बने हुए हैं।गाड़ी सरपट दौड़ रही थी।रास्ते में रुकते-रुकाते हम करीब दो बजे त्र्यंबकेश्वर पहुंच गए थे। यहां आने के लिए नाशिक जाना जरूरी नहीं है। यहां पहुंचे तो पुलिसवालों ने पार्किंग में जाने का रास्ता बंद कर रखा था।यह पार्किंग मंदिर के पास थी और दूसरी पार्किंग मंदिर से दो किलोमीटर दूर थी।हम गाड़ी मोड़ने लगे तो एक आदमी गाड़ी के पास आया और बोला-"पार्किंग जाना है तो चार सौ रुपए दो।" हमने कहा-"पुलिस वाले तो मना कर रहें हैं फिर पैसे क्यों..?"आपको जाना है या नहीं "वह बोला।जाना तो था ,साथ में और लोग भी थे ,दे दिए चार सौ रूपए और इस बार पुलिसवालों ने नहीं रोका तब सारा माजरा समझ आ गया। भ्...

द्वारका -सोमनाथ

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अंतिम भाग सोमनाथ मंदिर  सोमनाथ में आरती का समय हो गया था।भोले बाबा के दर्शन कर चुके थे पर मन फिर लालायित  हो उठा था... क्यों ना आरती में सम्मिलित हुआ जाए और हम फिर से कतार में लग चुके थे।आरती का आनंद ही कुछ अलग था। अनिर्वचनीय था। यहां पर लाइट और साउंड शो भी होता है पर दो दिन से यह बंद था क्योंकि प्रधानमंत्री जी का आगमन हुआ था।लोग मंदिर में सजावट के लिए लगे फूल ही तोड़ रहे थे...क्या करेंगे ये फूलों का...? पर आस्था की बात पर क्या प्रश्न करें...?तोड़ना तो नहीं चाहिए पर तोड़ रहे थे क्या ये इन्हें घर ले जाएंगे...?खैर....हम बाहर आ गए थे रात के नौ बजने वाले थे।भूख भी लग रही थी।हम चल दिए अपने होटल की ओर...रास्ते में अच्छा सा रेस्टोरेंट देख खाना खाया और बाकी जगह अगले दिन घूमेंगे यही सोच होटल पहुंच गए। यहां हमारा होटल मंदिर से कम से कम आठ किलोमीटर दूर था।यह बात हमें परेशान भी कर रही थी क्योंकि अगर सोमनाथ मंदिर के आस-पास होटल होता तो हम पैदल ही समुद्र के किनारे चले जाते। अगले दिन हमारी वंदे भारत अहमदाबाद के लिए बुक थी और हमें ग्यारह बजे चेक आउट भी करना था।सुबह जल्दी नहा-धोकर, चाय-नाश्ता ...

द्वारका -सोमनाथ

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  गतांक से आगे  सोमनाथ मंदिर गुजरात  तीन बजे हम सोमनाथ दर्शन के लिए निकल पड़े। सोमनाथ इस समय सजा हुआ था। फुटपाथिया दुकानें ढंकी हुईं थीं। साफ-सफाई तो होनी ही थी  क्योंकि प्रधानमंत्री जी का दौरा जो था।हम सबसे पहले "भालकातीर्थ "गए। मंदिर का प्रांगण विशाल था।कुंड भी बना हुआ था।मंदिर में श्रीकृष्ण की अधलेटी हुई प्रतिमा है,यही वह जगह है जहां भगवान श्रीकृष्ण को जरा नामक शिकारी ने उनके पैर में तीर मारा था।कहते हैं कि श्रीकृष्ण के पैर में एक चक्र था जो हमेशा चमकता रहता था।जिसे शिकारी ने हिरण की आंख समझ लिया था।मंदिर सुंदर और भव्य था। मंदिर की बनावट और शिल्प मन मोह रही थी। यहां पर भी छोटे-छोटे मंदिर बने हुए थे।हमने सबके दर्शन किए।इसके बाद हम सूर्य मंदिर गए। यहां पर आसपास कई मंदिर हैं।सूर्य मंदिर ज्यादा बड़ा तो नहीं था पर प्राचीन था। कोणार्क जैसी ही शिल्पकला थी । यहां सूर्य भगवान अपनी दोनों पत्नियों के साथ विराजमान हैं। यहां पर पांडव गुफा भी हैं।कहते हैं अपने वनवास काल में पांडव इन गुफाओं में निवास करते थे पर नाम तो था पर देखने की हिम्मत नहीं हुई क्योंकि वे काफी नीचे थीं और ग...

द्वारका -सोमनाथ

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  गतांक से आगे देवलिया पार्क, शासन गिर  करीब तीन घंटे बाद हम लोग हाइवे पर पहुंचे।ड्राइवर से हमने पूछा कि आप हमें हाइवे से क्यों नहीं लाए....वह बोला कि हम अगर हाइवे से आते तो समय ज्यादा लगता ...हमारे पल्ले यह बात नहीं पड़ी।शासन गिर का बोर्ड सामने ही लगा था।पहुंच गए क्या हम लोग...?मन में सवाल उठा ही था कि ड्राइवर ने कहा कि अब आप लोग "देवलिया पार्क "घूम लें....गिर राष्ट्रीय उद्यान में आपको कम से कम चार-पांच घंटे लगेंगे। "हमें नहीं जाना देवलिया पार्क...!!आप तो रिसोर्ट चलो।"हम छूटते ही बोले थे। "अरे मैडम!! रोज-रोज थोड़ी आना होता है। दो-तीन घंटे में आप फ्री हो जाओगे।शाम पांच बजे तक ही खुलता है यह पार्क।"हमने एक-दूसरे की ओर देखा।सबकी सहमति से तय हुआ कि चलते हैं,अब आ तो गए ही हैं।हमारी हां होते ही ड्राइवर ने हमसे कहा "बस से जाइएगा आप लोग...जिप्सी वाले चार से छह हजार चार्ज करते हैं।बस का टिकट दो सौ रुपए ही है और बस में आप मैन-मैन जगह घूम लेंगे। बस का टिकट बुक करने और बस के आने का इंतजार करने में करीब आधा घंटा बीत गया था।बस से हम नेशनल पार्क में चले तो ज्यादातर...

द्वारका-सोमनाथ

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  गतांक से आगे नागेश्वर ज्योतिर्लिंग  बेट द्वारका के रास्ते में ही गोपी तालाब पड़ता है।यह अपना पौराणिक महत्व रखता है।गोपी तालाब पहुंच कर हमने देखा कि यहां बहुत सारे प्राचीन मंदिर है,हर घर में मंदिर हैं।इसका नाम गोपी तालाब क्यों है...?पूछने पर हमें पता चला कि कृष्ण जब द्वारका आए थे तो उनके साथ सारी गोपियां भी आईं थीं और उन्होंने यहीं पर अपना देह त्याग किया था... यह उनके प्रेम और त्याग का अद्भुत उदाहरण था तबसे इसका नाम गोपी तालाब पड़ गया था। यहां की मिट्टी बिल्कुल पीली है जिसे गोपी चंदन के नाम से जाना जाता है।इस पवित्र मिट्टी से बना चंदन भक्त अपने माथे पर लगाते हैं और यहीं चंदन कृष्ण भक्ति की पराकाष्ठा का प्रतीक भी है,तालाब के पास घाट बने हुए थे।हमने घाट पर उतर कर जलांजलि अर्पित की।यह जगह पेड़ों से आच्छादित है और गोपी तीर्थ के रुप में जानी जाती है पर एक बात अखर रही थी कि हमारे भारतवर्ष में ऐसे स्थलों को जो अपना पौराणिक महत्व रखते हैं,उतना महत्व नहीं दिया जाता ,जितना देना चाहिए। यहां एक व्यवस्था होनी चाहिए जो यहां का रखरखाव करे,भले ही इसके लिए टिकट की व्यवस्था की जाए,इतने सुंदर औ...