नासिक, शिर्डी, औरंगाबाद
गतांक से आगे रोप वे , सप्तश्रृंगी शक्तिपीठ प्राचीन पर्णकुटी नासिक सप्तश्रृंगी देवी जिस धर्मशाला में हम रुकने वाले थे ,उसे देखकर आनंद ही आ गया। बड़े-बड़े छायादार पेड़ों से आच्छादित गार्डन और चारों और फूल-पौधे लताएं,बीच में दो मंदिर और दो मंजिला भवन चारों और हरियाली....ऐसा लगा जैसे हम वन में आ गए और फिर कमरे , उन्हें देख ऐसा लगा कि यहीं रुक जाओ कम से कम एक महीना....एक बड़ा सा कमरा ,हाल,किचन,बाथरूम और सभी सामान जैसे फ्रिज,अलमारी, सोफा सेट,डबल बेड, स्टडी टेबल, ड्रेसिंग टेबल,एसी,और आरो.... एक्स्ट्रा गद्दे और चादर।वाह....लिफ्ट की सुविधा अलग....बस मन गदगद हो गया....गलियारे में बैठने के लिए भी कुर्सियां पड़ी हुईं थीं और किराया मात्र ग्यारह सौ रूपए.... कहां होटल ढाई-तीन हजार से कम नहीं थे और कहां यह ,उन सभी होटलों को मात देती हुई।प्रबंधक ने कहा कि ऑफ सीजन के कारण आपको यहां जगह मिल गई, नहीं तो हमारे यहां पहले से ही बुक रहते हैं कमरे....हमने ईश्वर को धन्यवाद दिया, उन्होंने हमारे इस सफर को यादगार बना दिया था।अब हमारे पास पूरा एक दिन था....क्या किया जाए....? रास्ते में आते ह...