द्वारका -सोमनाथ
गतांक से आगे देवलिया पार्क, शासन गिर करीब तीन घंटे बाद हम लोग हाइवे पर पहुंचे।ड्राइवर से हमने पूछा कि आप हमें हाइवे से क्यों नहीं लाए....वह बोला कि हम अगर हाइवे से आते तो समय ज्यादा लगता ...हमारे पल्ले यह बात नहीं पड़ी।शासन गिर का बोर्ड सामने ही लगा था।पहुंच गए क्या हम लोग...?मन में सवाल उठा ही था कि ड्राइवर ने कहा कि अब आप लोग "देवलिया पार्क "घूम लें....गिर राष्ट्रीय उद्यान में आपको कम से कम चार-पांच घंटे लगेंगे। "हमें नहीं जाना देवलिया पार्क...!!आप तो रिसोर्ट चलो।"हम छूटते ही बोले थे। "अरे मैडम!! रोज-रोज थोड़ी आना होता है। दो-तीन घंटे में आप फ्री हो जाओगे।शाम पांच बजे तक ही खुलता है यह पार्क।"हमने एक-दूसरे की ओर देखा।सबकी सहमति से तय हुआ कि चलते हैं,अब आ तो गए ही हैं।हमारी हां होते ही ड्राइवर ने हमसे कहा "बस से जाइएगा आप लोग...जिप्सी वाले चार से छह हजार चार्ज करते हैं।बस का टिकट दो सौ रुपए ही है और बस में आप मैन-मैन जगह घूम लेंगे। बस का टिकट बुक करने और बस के आने का इंतजार करने में करीब आधा घंटा बीत गया था।बस से हम नेशनल पार्क में चले तो ज्यादातर...