नेह कली मुरझाती है।


विरह वेदना बदली बनकर

हृदय गगन में छाती है

प्रीत दामिनी सी मन में तब

कड़क-कड़क गिर जाती है।।


सूने से इन नयनों से जब

पीड़ा छलके गगरी सी

बुनती हूँ सपनों के जाले

उलझी-उलझी मकड़ी सी

रंग नहीं कोई जीवन में

रजनी घिर कर आती है।

प्रीत दामिनी सी मन में तब

कड़क-कड़क गिर जाती है।

विरह-------------------।।


धूप समान सुलगता ये तन 

भाव सुलगते अंगारे

वनवासी सा प्रेम हुआ है

गए साथ हैं सुख सारे

स्मृतियों के कानन में जैसे

हिरनी राह न पाती है।

प्रीत दामिनी सी मन में तब

कड़क-कड़क गिर जाती है।

विरह------------------।।


मंथन मन का करते-करते

गरल हाथ में आया है

पीकर प्यास बुझेगी कैसे

हृदय बहुत घबराया है

झोली भरकर कंटक पाए

नेह कली मुरझाती है

प्रीत दामिनी सी मन में तब

कड़क-कड़क गिर जाती है।

विरह--------------------।।



अभिलाषा चौहान

स्वरचित मौलिक






14 टिप्‍पणियां:

  1. मंथन मन का करते-करते
    गरल हाथ में आया है
    पीकर प्यास बुझेगी कैसे
    हृदय बहुत घबराया है
    झोली भरकर कंटक पाए
    नेह कली मुरझाती है
    प्रीत दामिनी सी मन में तब
    कड़क-कड़क गिर जाती है।
    बहुत मार्मिक सृजन प्रिय अभिलाषा जी।

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  2. बहुत सुन्दर !
    बरबस ही प्रसाद की पंक्तियाँ याद आ गईं -
    इस करुणाकलित ह्रदय में क्यों विकल रागिनी बजती
    क्यों हाहाकार स्वरों में वेदना असीम गरजती

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    1. Gopesh Mohan Jaswal सहृदय आभार आदरणीय 🙏 आपकी प्रतिक्रियाएं भले ही कभी-कभी मिले पर मन में उत्साह का सृजन करती हैं और भी अच्छा करने की प्रेरणा देती है ।आपका पुनः धन्यवाद 🙏🙏 कभी-कभी मनोबल बढ़ाने के लिए अपनी ऊर्जावान प्रतिक्रियाएं अवश्य देते रहिए।🙏🙏 सादर

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  3. ऐसी छंदबद्ध कविता को रचने की प्रतिभा तो जन्मजात होती है अनुराधा जी । मन भर आया पढ़कर ।

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    1. सहृदय आभार आदरणीय 🙏 सादर आपकी इतनी अच्छी प्रतिक्रिया पाकर उत्साहवर्धन हुआ।

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  4. धूप समान सुलगता ये तन

    भाव सुलगते अंगारे

    वनवासी सा प्रेम हुआ है

    गए साथ हैं सुख सारे

    स्मृतियों के कानन में जैसे

    हिरनी राह न पाती है।

    प्रीत दामिनी सी मन में तब

    कड़क-कड़क गिर जाती है..पढ़कर लगा जैसे हाई स्कूल के परीक्षा कक्ष में बैठी हूँ..और भावार्थ लिखना है..नायाब पंक्तियाँ..सुन्दर कृति..

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  5. सहृदय आभार आदरणीया 🙏 इतनी सुन्दर प्रतिक्रिया पाकर मैं धन्य हुई।

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  6. जय मां हाटेशवरी.......

    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    28/02/2021 रविवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में. .....
    सादर आमंत्रित है......


    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    https://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

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