मैं हूं आम आदमी.....

मैं आम आदमी हूं
नहीं मेरी कोई पहचान
आम समझकर
कर दिया जाता
मुझे अनदेखा
पर मैं सब देखता हूं
क्योंकि खास लोग
मेरे बगैर नहीं बन सकते खास
उन्हें सदा मुझसे है आस
नहीं मेरे पास कुछ भी
मैं हूं आम आदमी
मुझे कमजोर न समझना
न हो मेरी पहचान
पर सामर्थ्य है मुझमें
सत्ता परिवर्तित करने की
आता हूं जब अपनी पर
बन जाता हूं खास
और तुम हो जाते हो आम
इतिहास साक्षी है इसका
मैं जब जागा
हुई क्रांतियां अनेक
पल में बदल गया इतिहास
बस मैं परखता हूं
सब ओर निरखता हूं
अति सर्वत्र वर्जयेत पर
अमल करता हूं
मैं गिरगिट नहीं जो
रंग बदल दूं
क्योंकि मैं आम आदमी हूं
बस मेरी यही पहचान

अभिलाषा चौहान

चित्र गूगल से साभार 

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