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यात्रा भव्यता से दिव्यता तक-२

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 गतांक से आगे प्रयागराज के बाद हमारा अगला पड़ाव शिव की नगरी काशी था।बनारस,वाराणसी या काशी कुछ भी कहो पर है तो शिव का धाम ही। प्रयागराज से हम वंदे भारत ट्रेन से डेढ़ घंटे में काशी पहुंच गए।इन ट्रेनों में यात्रा का आनंद ही अलग है।कब सफर आरंभ होता है और कब समाप्त हो जाता है,आपको पता ही नहीं चलता। बनारस जंक्शन और वाराणसी जंक्शन यह दो स्टेशन हैं वहां,हम बनारस रेलवे स्टेशन पर उतरे।लिफ्ट और एस्केलेटर की सुविधा वृद्ध और अशक्त जनों के लिए उपहार से कम नहीं है।वैसे स्टेशन भी सुंदर हो गए हैं। व्यवस्था और अव्यवस्था का अंतर तुरंत समझ आ जाता है। यहां से हम ई रिक्शा के माध्यम से होटल के लिए रवाना हुए। गलियां संकरी होने के कारण हमारे होटल मैनेजर ने हमें ई-रिक्शा लेने के लिए कहा था।हमने सोचा इससे शायद हम होटल तक आसानी से पहुंच पाएंगे पर उसने एक गली के आगे रिक्शा रोक दिया।इससे आगे आपको पैदल जाना है। क्या..?ये सर्पीली संकरी गलियों में तो हम खो जाएंगे..? लेकिन तभी होटल से एक अटेंडेंट हमें लेने आ गया।हम उसके पीछे-पीछे चलते हुए सोच रहे थे कि इन गलियों में से दोबारा तो निकल नहीं पाएंगे...गलती हो गई जो यहा...

यात्रा भव्यता से दिव्यता तक

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यात्राएं मन को आह्लादित करती हैं। अनुभव देती हैं और खुद से परे सोचने पर विवश करती हैं।यदि ये यात्राएं धार्मिक स्थलों से जुड़ी हों तो आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कराती हैं।ऐसी ही यात्रा की हमने अभी..."प्रयागराज,वाराणसी और अयोध्या "की। सनातन और शाश्वत का संगम इन धार्मिक नगरियों में देखने को मिला,जो अद्वितीय और अलौकिक था।हम क्षणभंगुर इंसान उस परम सत्य की अनुभूति वहीं जाकर कर पाते हैं।हम आज हैं और कल नहीं होंगे पर हमारे सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्रबिंदु तब भी थे जब आततायी इन्हें मिटाने की कोशिश कर रहे थे और आज भी हैं और हमेशा रहेंगे।भारत के अतुलनीय वैभव को सहेजे इन्हीं स्थलों में एकता और अखंडता के दिव्य दर्शन होते हैं। राजनीतिक प्रपंचों से रहित, जातिगत भेदभाव से ऊपर और अमीर-गरीब के पाखंड से रहित ये स्थल एक पल में सांस्कृतिक समागम की भव्यता के दर्शनीय स्थल बन जाते हैं।बस एक ही चेतना सर्वत्र व्याप्त हो जाती है जो है अहम के विसर्जन की....बस अपने अंतर में आराध्य के दर्शन की ललक लिए दीन-दुनिया से बेखबर हर इंसान बस भक्त बन जाता है।यही दिव्यता उस भव्यता को प्रकट करती है जिसने आर्यावर्त ...